ऑपरेशन बालाकोट में ग़लत ‘सूत्रों’ के भरोसे ही रहा भारतीय मीडिया

मैं तीन दशक से पेशेवर पत्रकार हूँ। कई बड़े और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग की।...

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सिन्धु का पानी तो भारत सिर के बल खड़े होकर भी नहीं रोक सकता!

प्रधानमंत्री होने के नाते नरेन्द्र मोदी को अच्छी तरह से मालूम था कि पाकिस्तान के हिस्से वाले सिन्धु के पानी को रोकना तक़रीबन नामुमकिन है। सच्चाई तो ये है कि 1960 में दोनों पड़ोसियों के बीच हुए सिन्धु नदी जल समझौते के मुताबिक़, भारत को जो 20 फ़ीसदी पानी मिला था, उसके दोहन के लिए भी हम आज तक कोई ख़ास इन्तज़ाम नहीं कर पाये।

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गाय की आत्मकथा: जानवर से पशु, आस्था और साम्प्रदायिक पाखंड बनने का सफ़र

ज्यों-ज्यों उम्र हम पर हावी होने लगती है, त्यों-त्यों हमारा जीवन नरक हो जाता है। पेट भरने के लिए हमें सड़कों पर भटकता पड़ता है। आते-जाते वाहन और इंसान सभी हमें दुत्कारते रहते हैं। सड़क पर दिखने वाली हरेक गाय कहने को पालतू है, लेकिन उसके पालनहार उसके साथ कितनी क्रूरता से पेश आते हैं, ये ज़रा कोई हमसे पूछे। साफ़-सुथरा चारा खाने वाले, कैसे कूड़े-कचरों में मुँह मारकर पॉलीथीन की थैलियों समेत सड़े-गले को खाकर अपना पेट पालते हैं, क्या इंसान इसे कभी समझ पाएगा? गायों का बुढ़ापा जितना कष्टकारी जीवन शायद ही किसी और प्राणी का होता हो।

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सरासर झूठ है कि ‘नोटबन्दी से अर्थव्यवस्था को हुआ 5 लाख करोड़ रुपये का फ़ायदा’

‘ख़बर’ लिखने वाले रिपोर्टर और उसे सम्पादित तथा प्रकाशित करने वाले सम्पादक ने ख़बर में इस बात का कोई ब्यौरा नहीं दिया कि आख़िर ये तय कैसे हुआ कि नोटबन्दी से अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ रुपये का फ़ायदा हुआ है? मज़े की बात ये भी है कि भक्ति-भाव में डूबे तमाम मीडिया संस्थानों ने आव देखा न ताव और झूठ को फैलाने की भेड़-चाल में शामिल में गये! दर्जनों वेबसाइट्स ने इस ‘भ्रामक और झूठी ख़बर’ को कॉपी-पेस्ट करके अफ़वाह को फैलाने में अपना योगदान देना शुरू कर दिया! पढ़िए पूरा विश्लेषण....

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