बहरहाल, किसी ने क़िस्सा सुनाया कि तमिलनाडु में एक रिवाज़ है। बेटी का पिता जब रिश्ता लेकर वर पक्ष के यहाँ पहुँचता है तो उससे पूछा जाता है, ‘भाई कितना ख़र्च करोगे?’ बेटी का पिता अपनी हैसियत के मुताबिक़, हाथ जोड़कर, एक ‘रक़म’ बोलता है।
तभी मोल-तोल को आगे बढ़ाने की ग़रज़ से लड़के का पिता तरह-तरह के ख़र्चों की बात करता है। इन ख़र्चों के बारे में एक-एक करके लड़की के पिता से पूछा जाता है तो वो हाथ जोड़कर दोहराता रहता है कि सब उसी ‘रक़म’ में शामिल है जो वो बोल चुका है।
ये सिलसिला थोड़ी देर तक चलता है। लेकिन हर बात पर बेटी का बाप पिछली बात की तरह हाथ जोड़कर कहता है कि सारे ख़र्च उसी ‘रक़म’ में शामिल हैं।

बिल्कुल बेटी के बाप की तर्ज़ पर नरेन्द्र मोदी देश को अपनी रागिनी सुनाते नहीं थक रहे हैं कि ‘दो साल में मेरी सरकार का कोई घोटाला सामने नहीं आया’। बाक़ी कोई भी ऐसा सवाल यदि बीजेपी के चुनाव घोषणा पत्र का वास्ता देकर या उनके चुनावी भाषणों का हवाला देकर पूछा जाए तो उनका एक ही जवाब है, ‘दो साल में मेरी सरकार का कोई घोटाला सामने नहीं आया’।
अब एक नयी बात आयी है कि जो उनका गुणगान नहीं कर रहे हैं, वो लोग काँग्रेसी राज में हुई लूट की हिस्सेदारी पा रहे थे। वो तो ग़ाली देंगे ही। लेकिन मोदी जी का पराक्रम देखिए कि उन्होंने 730 दिनों (दो साल) में 700 नयी योजनाएँ चालू कर दीं। ये योजनाओं की दस्त है। इससे देश की सेहत का गिरना लाज़िमी है! इसी ORS घोल पिलाते हुए मोदी कहते हैं कि कहीं कोई कमी भी रह जाएगी तो भी विकास की ख़ातिर मैं कोई पाप नहीं करूँगा। यानी मुझे कुछ भी कहना, पापी मत कहना! क्योंकि मैं बहुत मेहनत करता हूँ! इसीलिए ‘दो साल में मेरी सरकार का कोई घोटाला सामने नहीं आया’!

साफ़ है, मान लीजिए कि देश में मोदी सरकार में कोई घोटाला नहीं हो रहा है। सारे घोटालेबाज़ नरेन्द्र मोदी के सत्तासीन होते ही ईमानदार हो गये। अफ़सरों, बाबुओं, दलालों, चमचों, धन्नासेठों ने मोदी राज आते ही ईमानदार की ऐसी राह पकड़ी जैसे बहुत लोग माँसाहार त्यागकर शाकाहारी बन जाते हैं!
क्या ऐसी व्याख्याएँ या ज़ुमलेबाज़ी ग़ैर-भक्तों के हलक़ से नीचे उतर सकती है? जवाब है, ‘दो साल में मेरी सरकार का कोई घोटाला सामने नहीं आया’!

अब क्या जान लेंगे बच्चे की! अकेला मोदी क्या-क्या करे? पार्टी और सरकार में बंगारूओं की ख़ाल ओढ़कर बैठे लोगों पर नज़र रखे या ज़ुमले-भरे वादों को पूरा करे। इसीलिए हर बीमारी का रामबाण इलाज़ है, ‘दो साल में मेरी सरकार का कोई घोटाला सामने नहीं आया’!

ऐसी मनोदशा के लिए एक प्रचलित मुहावरा है, ‘हाथी के पैर में सबका पैर!’ यानी ‘दो साल में मेरी सरकार का कोई घोटाला सामने नहीं आया’!