एक बार एक राजा के दरबार में दो दर्ज़ी जा पहुँचे। उन्होंने कहा कि हम स्वर्ग से धागा लाकर पोशाक बनाते हैं, जिसे देवी-देवता पहनते हैं। हमारी पोशाकों की वजह से ही तो अदृश्य रहते हैं! इससे भी बड़ी बात ये है कि मूर्खों को ये पोशाक कभी दिखती ही नहीं!

ये सुनकर राजा को बहुत आश्चर्य हुआ! उसने सोचा, यदि ऐसी अदृश्य कर देने वाली पोशाक मेरे पास हो तो मैं आसानी से जान जाऊँगा कि मेरे राज्य में कौन-कौन और कुल कितने मूर्ख हैं! तब राजा ने दर्ज़ियों को आज़माने की सोची और बोला, “तुम लोग मेरे लिए भी देवताओं जैसी पोशाक बनाओ। लेकिन याद रखो, यदि तुम्हारा दावा ग़लत निकला तो तुम्हारा सिर क़लम करवा दिया जाएगा और यदि सही निकला तो मुँह माँगा इनाम मिलेगा!”

दर्ज़ियों ने नयी पोशाक बनाने के लिए 50 दिन की मोहलत माँगी और महल के ही एक कमरे में राजसी ठाठ से रहने लगे। कभी-कभार देर रात तक खटर-पटर करते रहते। इस बीच, इन अनोखे दर्ज़ियों की कहानी राज्य भर में जंगल के आग की तरह फैल गयी। फिर एक दिन राजा ने अपने प्रधानमंत्री को ये जानने के लिए भेजा कि पोशाक कैसी बन रही है?

अपने कमरे में प्रधानमंत्री को आया देख एक दर्ज़ी ने अपना हाथ ऊपर उठाकर कहा, देखिए कितना सुन्दर रेशा है! प्रधानमंत्री को कुछ भी नज़र नहीं आया। तभी उसके दिमाग़ में वो बात कौंध गयी कि मूर्खों को पोशाक दिखायी नहीं देगी। उसे लगा कि यदि मैंने सच बोला तो राजा को लगेगा कि मैं मूर्ख हूँ और मेरी नौकरी चली जाएगी। लिहाज़ा, उसने बोला, ‘हाँ-हाँ, बहुत सुन्दर है।’

फिर प्रधानमंत्री ने राजा को भी बताया कि ‘बहुत सुन्दर बन रही है आपकी पोशाक!’ राजा बहुत ख़ुश हुआ। इसके बाद, एक दिन राजा भी दर्ज़ियों के कमरे में गया। उसे भी कुछ नहीं दिखा। फिर भी वो चुप रहा क्योंकि इससे ये साबित हो सकता था कि राजा से ज़्यादा बुद्धिमान है प्रधानमंत्री! लिहाज़ा, राजा भी चुप रहा!

50 दिन बाद दोनों दर्ज़ी दरबार में हाज़िर हुए और ऐलान किया कि कल वो राजा को जनता के सामने ये पोशाक पहनाएँगे और फिर राजा की सवारी निकलेगी। अगले दिन राजा को ऐसी पोशाक पहनायी गयी, जो किसी को दिख नहीं रही थी। लेकिन कोई कुछ नहीं क्योंकि ऐसा बोलना ख़ुद को मूर्ख मानने जैसा होता! सभी चुप रहे और नंग-धड़ंग राजा ने बड़ी शान से अपनी सवारी निकाली!

ये काल्पनिक कहानी आज हक़ीक़त बनकर नज़र आ रही है। नोटबन्दी से सब परेशान हैं। लेकिन मुँह से बोल नहीं फूट रहे हैं क्योंकि जो बोलेगा उसे देश भक्त नहीं होने का प्रमाण दे दिया जाएगा। इसीलिए दैवीय प्रकोप से बचने के लिए सभी नोटबन्दी की वैसे ही तारीफ़ कर रहे हैं जैसे राजा की पोशाक अदृश्य थी!

बहरहाल, 50 दिन में अब ज़्यादा नहीं बचे हैं। जल्द ही दिखने लगेगा कि अच्छे दिनों की तरह देश भी बदल गया, भ्रष्टाचार मिट गया, कालाधन सफ़ेद हो गया, रोज़गार बढ़ गये, महँगाई नदारद हो गयी, रामराज्य आ गया!

बोलो सियावर रामचन्द्र की जय!!!