ग़लत तो हमेशा ग़लत ही कहलाएगा! सिर्फ़ तीन साल पहले 2014 की बात है। मौक़ा था लोकसभा चुनाव का। विपक्ष ने चुनाव आयोग से शिकायत की कि मध्य प्रदेश में भी बिजली के बिल पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तस्वीर के साथ राज्य सरकार की उपलब्धियाँ छापकर बाँटी गयी थीं। तब चुनाव आयोग के आदेश पर बिजली की बिलों से शिवराज की तस्वीर के अलावा सरकारी प्रचार को हटाया गया। तभी मायावती के हाथियों को भी जनता के पैसों से ढकवाया गया था। दिल्ली में भी आम आदमी का नाम जोड़कर और अरविन्द केजरीवाल की तस्वीरें चस्पाँ करके मोहल्ला क्लीनिकों के ज़रिये सत्तारूढ़ पार्टी ने सरकारी सम्पत्ति का शर्मनाक और नाजायज़ इस्तेमाल किया। ऐसे पापों को ढकने का वित्तीय बोझ भी जनता पर ही पड़ा!

इसीलिए, अब उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने केन्द्र सरकार के खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत जारी हुए 3.14 करोड़ राशन कार्ड को रद्द करके उनकी जगह ‘आधार’ आधारित जो स्मार्ट कार्ड रूपी नया राशन कार्ड बनाने का निर्णय लिया है, वो सर्वथा सराहनीय है! उम्मीद करनी चाहिए कि इससे जन वितरण प्रणाली यानी PDS में दशकों से घुसी हुई उन धाँधलियों पर नकेल कसेगी जिसके लिए मूलतः आधार की कल्पना की गयी थी। बस इतना ध्यान रखा जाए कि प्रस्तावित नये स्मार्ट राशन कार्ड पर अब कोई भगवा छाया न सवार हो जाए, वर्ना इसकी सफ़ाई का बोझ भी बेचारी आम जनता पर ही पड़ेगा। इसी क्रम में अखिलेश की समाजवादी एम्बुलेंस सेवा से ‘समाजवादी’ शब्द को हटाना भी बिल्कुल माकूल फ़ैसला है।

यहीं, लगे हाथ, एक राष्ट्रीय नामकरण नीति भी बना ली जानी चाहिए। ताकि किसी की भी सरकार आये और जाए नीतियों, योजनाओं, भवनों और सड़कों वग़ैरह के नये नामकरण की प्रथा हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म हो सके। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नये नामकरण का प्रचंड शौक़ है। इसे देखते हुए भी ये मौजूदा दौर की बहुत अहम ज़रूरत है। उन्होंने भी योजना आयोग को नीति आयोग, राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना और राष्ट्रीय पेंशन योजना को अटल पेंशन योजना जैसे नाम दिये हैं। इसके अलावा, पिछली सरकार की दर्जनों अन्य योजनाओं का भी नाम बदलकर उसे अपनी बनाकर पेश करने की प्रवृति भी जगज़ाहिर है! महापुरुषों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता जताने में कोई हर्ज़ नहीं है। लेकिन सत्ता-परिवर्तन के बाद दुर्भावनापूर्वक किये जाने वाले बदलावों की आदत पर भी स्थायी रोक लगनी ही चाहिए।