अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के लोगों को धमकाया है कि “यदि उनके ख़िलाफ़ महाभियोग चलाया गया तो अर्थव्यवस्था ढह जाएगी, बाज़ार टूट जाएगा और हरेक शख़्स बहुत ग़रीब हो जाएगा!” ट्रम्प ने अमेरिकियों से सवाल भी किया कि “ऐसे व्यक्ति पर महाभियोग कैसे चल सकता है, जिसने काफ़ी रोज़गार दिये हों?” ट्रम्प का ये बयान अपने पूर्व वकील माइकल कोहेन के सनसनीखेज़ ख़ुलासों पर आया। इससे पहले 51 वर्षीय कोहेन ने न्यूयॉर्क की एक अदालत में ट्रम्प की ख़ातिर किये गये ग़ुनाहों को क़बूल करके सनसनी फैला दी।

कोहेन ने अदालत को बताया कि उन्होंने डॉनल्ड ट्रम्प के कहने पर पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स के अलावा एक और मॉडल को अपना मुँह बन्द रखने के लिए 2.8 लाख डॉलर या क़रीब 2 करोड़ रुपये की घूस दी, क्योंकि उन दोनों ने ट्रम्प से अपने अन्तरंग सम्बन्धों का दावा किया था। कोहेन ने जिन ग़ुनाहों को क़बूल किया, उसमें ट्रम्प के लिए घूसख़ोरी, टैक्स चोरी, ग़लत-बयानी और वित्तीय क़ानूनों का उल्लंघन करने के अपराध शामिल हैं। कोहेन के बयान को लेकर अमेरिका में गहमागहमी है कि ट्रम्प पर महाभियोग चल सकता है। इसी प्रसंग में ट्रम्प ने अमेरिकियों को धमकाया है।

अब ज़रा इस ख़बर के भारतीय सन्दर्भ का अनुमान लगाने की कोशिश करें, क्योंकि ट्रम्प की तरह ही हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कोई कम बड़बोले नहीं हैं। यहाँ भी चुनाव सामने हैं। तमाम सर्वेक्षण बता रहे हैं कि मोदी की हवा ख़राब है। लिहाज़ा, इस बात की आशंका को नकार पाना मुश्किल हैं कि मोदी अचानक बोल बैठें कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से जनता ने यदि मुझे सत्ता से बाहर कर दिया तो भारत, मुसलिम राष्ट्र बन जाएगा। दुनिया का भरोसा सबसे लिंचिंग-तंत्र वाली सबसे त्वरित न्याय व्यवस्था से उठ जाएगा। याद है कि इसी तर्ज़ पर बीजेपी ने 2015 में बिहार के चुनाव के वक़्त जनता को आगाह किया था कि यदि वो हार गयी तो पाकिस्तान में दिवाली मनायी जाएगी।

अभी 15 अगस्त को ही नरेन्द्र मोदी ने लाल क़िले से देश को बताया था कि उनके गद्दीनशीं होने के ही 70 साल से घिसट रहे ‘विकास’ ने तूफ़ानी रफ़्तार पकड़ ली। ये बाक़ायदा राफेल से प्रेरित थी, क्योंकि फ्रेंच भाषा में राफेल का मतलब तूफ़ानी है। मज़े की बात तो ये है कि मोदी जिस वक़्त अपने ‘विकास’ की रफ़्तार को राफेल की सुपरसोनिक गति 2000 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज़ बता रहे थे, उससे पहले उनकी ही सरकार का साँख्यिकी मंत्रालय, ‘विकास दर’ के तमाम आँकड़ों और पैंतरों का टायर पंचर कर चुका है। लिहाज़ा, ट्रम्प की तरह मोदी का ये कहना तो बनता है कि ‘यदि जनता ने उन्हें भगा दिया तो बेचारा ‘विकास’ अनाथ हो जाएगा! अर्थव्यवस्था ढह जाएगी! बाज़ार टूट जाएगा! सूट-बूट वाले दोस्तों को अटल जी की कर्मभूमि से पलायन करना पड़ेगा! इससे सवा सौ करोड़ भारतवासी बेहद ग़रीब हो जाएँगे!’

यही वजह है कि भक्त मंडली दिन-रात यही झूठ फैला रही है कि मोदी का विकल्प कौन! हालाँकि, जनता ऐसे झूठख़ोरों को चीख़-चीख़कर बता रही है कि कौआ-कुत्ता को वोट दे देंगे, लेकिन मोदी को एक पल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लेकिन गोदी-मीडिया के गले पर संघियों की छुरी रखी हुई है कि ख़बरदार, ‘जनता का सच जनता को बताओगे तो सिर क़लम कर दिया जाएगा!’ अब ज़रा उस प्रसंग का स्मरण कीजिए जब ट्रम्प की नीतियों के ख़िलाफ़ अमेरिका के 100 से ज़्यादा अख़बारों ने एक साथ सम्पादकीय लिखे थे। शायद इसीलिए, क्योंकि अमेरिकियों को ट्रम्प से वैसा डर नहीं लगता, जैसा भारतीय मीडिया में मोदी-शाह का ख़ौफ़ है!

मोदी राज में कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता! क्योंकि यहाँ अधिकतर मीडिया संस्थानों और उसके मालिकों का बधियाकरण हो चुका है। इस मोर्चे पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने सबसे मज़बूत लोकतंत्र को भी पटखनी देकर दिखा दिया है! ऐसा सिर्फ़ इसीलिए हो पाया, क्योंकि भारत ने अब फ्राँस को पछाड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्ज़ा पा लिया है। हालाँकि, इस छठे स्थान का कोई मतलब नहीं है कि क्योंकि ख़ुशहाली का असली प्रतीक प्रति व्यक्ति आय होता है। इस मोर्चे पर नोटबन्दी और जीएसटी के घटिया क्रियान्वयन ने जनता की जेब का दो साल पहले ही खाली कर दिया था।

ट्रम्प ने अमेरिका में वैसे ही रोज़गार के अवसर विकसित करवाये हैं, जैसे भारत में नरेन्द्र मोदी ने ‘स्वच्छ भारत’ अभियान चलाया है! अब विकास पुरुष मोदी को ये भला कौन बताये कि बेचारा ‘स्वच्छ भारत’ ही पिछले जन्म में यानी मनमोहन सिंह के ज़माने में ‘निर्मल भारत’ कहलाता था। इसीलिए प्रधानमंत्री ने ये कहकर न्यूटन के गति के नियमों में चौथा नियम जोड़ दिया कि “यदि 70 साल पहले स्वच्छ भारत शुरू किया जाता तो भारत रोग मुक्त हो गया होता!” ये कोई मामूली खोज़ नहीं है! क्योंकि अमेरिका, इंग्लैंड जैसे दुनिया के तमाम विकसित देशों में दशकों से भारत के मुक़ाबले ज़बरदस्त साफ़-सफ़ाई का आलम बेहतरीन है। फिर भी वो कभी रोग मुक्त नहीं हो पाये!

वैसे तो मोदी ने अपने इस अद्भुत स्वच्छता सिद्धान्त का प्रतिपादन लाल क़िले से किया था, लेकिन उन्होंने परमप्रिय गुजरातियों को भी, जूनागढ़ में अलग से समझाया कि ‘स्वच्छ भारत’ जैसे कार्यक्रमों को लेकर उनका मज़ाक उड़ाया जाता है। हालाँकि, गुजराती अपने फेंकूँ की आदतों से वाक़िफ़ हैं। उन्हें पता है कि उनका लाड़ला ‘अपना फ़र्ज़ी गुणगान करने की लाइलाज़ बीमारी’ से पीड़ित है। इसीलिए पहले लाल क़िले से और फिर जूनागढ़ में मोदी ने फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट की भ्रष्ट व्याख्या कर दी। इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “स्‍वच्‍छता ने 3 लाख लोगों की ज़िन्दगी बचायी है।” जबकि हक़ीक़त ये है कि WHO ने लिखा है कि कि स्वच्छता अभियान सही से लागू हुआ होता तो भारत में 3 लाख मौतें नहीं होतीं!

चुनाव को सामने देख मोदी महीने से एक और हवाबाज़ योजना को बारम्बार आसमान में उछाल रहे हैं। ये भी ‘माँ गंगा ने बुलाया है’ जैसी ही है। गंगा की सफ़ाई की तरह ही मोदी ने चुटकी बजाकर ऐसी योजना का ऐलान कर दिया जो 50 साल में भी शायद ही पूरी हो सके! उन्होंने कहा कि ‘जल्द ही हरेक तीन संसदीय क्षेत्रों के लिए एक मेडिकल कॉलेज होगा। जैसे-जैसे ये लागू होगा, वैसे-वैसे मेडिकल कॉलेज के लिए संसदीय क्षेत्रों की संख्या को घटाकर पहले प्रति दो संसदीय क्षेत्र और फिर हरेक क्षेत्र कर दिया जाएगा। अन्ततः हर ज़िले में एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल होगा!’

अब ज़रा सोचिए कि ‘हरेक ज़िले में मेडिकल कॉलेज’ कितना शानदार जुमला है! इसके बारे में यदि ‘अच्छे दिन’ को पता चल जाए तो बेचारा आत्मग्लानि में ख़ुदकुशी कर ले! अरे, जब ‘स्वच्छ भारत’ से ही देश ‘रोग मुक्त’ हो चुका हो तो फिर मेडिकल कॉलेजों की ज़रूरत ही किसे होगी! मोदी भी जानते हैं कि वो फेंक रहे हैं! वर्ना, वो देश को बताते कि बीते सवा चार साल में उन्होंने कितने मेडिकल कॉलेज या एम्स चालू करवाये? मेडिकल कॉलेजों में कितने अध्यापकों, टेक्नीशियनों, नर्सों वग़ैरह के पद खाली हैं? यक़ीन जानिए, स्वास्थ्य सेक्टर ने जुड़े इन मोर्चों का प्रदर्शन बेहद मायूसी भरा और शर्मनाक रहा है। स्टेंट्स वग़ैरह के नाम में कटौती की जो कोशिश हुई थी, उसका असर भी हाथी के दिखाने वाले दाँतों जैसा ही है। लेकिन शिग़ूफ़ा छोड़ा गया है ‘हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज’ का।

मुमकिन है कि डॉनल्ड ट्रम्प की तर्ज़ पर जल्द ही आपको मोदी की ये लफ़्फ़ाज़ी भी सुनायी दे कि जनता उसे कैसे सत्ता से बाहर कर सकती है, जो देश को एक साथ ‘रोग मुक्त, मेडिकल कॉलेज युक्त’ बनाने के लिए अवतरित हुआ हो! फ़िलहाल, मोदी के चेले-चपाटी परेशान हैं कि सस्ते इलाज़ के नाम पर कई महीने से जिस महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना की डुगडुगी बजायी जा रही है, उसके लिए 25 सितम्बर यानी दीनदयाल जयन्ती पर ‘मेगा शो का तमासा’ किस राज्य में किया जाए? विधानसभा चुनाव वाला राज्य चुना जाए या फिर लोकसभा वाला देश! संघियों के चेहरे की हवाईयाँ अभी से उड़ी दिख रही है, क्योंकि सभी जगह बीजेपी की हालत पतली है।

विपक्ष के एकजुटता को भले ही नरेन्द्र मोदी, ‘तेल-पानी का मिलन’ बताते फिरें, लेकिन जगज़ाहिर है कि विपक्षी एकता की ख़बरों ने संघियों की नींद उड़ा रखी है। संघियों को पता है कि मोदी राज की जुमलेबाज़ी, भ्रष्टाचार और नफ़रत की राजनीति की वजह से बीजेपी की हालत बेहद पतली हो चुकी है। इसीलिए, रणनीति बनी है कि चुनाव से पहले धड़ाधड़ 50 लाख लोगों को ‘हेल्थ कार्ड’ बाँट दिया जाए। ये 10 करोड़ हेल्थ कार्ड के मूल-लक्ष्य के मुक़ाबले सिर्फ़ 5 फ़ीसदी होगा, लेकिन ढोल पीटा जाएगा कि मोदी सरकार ने सबको ‘आयुष्मान’ बना दिया है।

हेल्थ कार्ड बाँटने के लिहाज़ से संघ के स्वयंसेवकों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि यही लोग तो चुनाव में बीजेपी का मुखौटा लगाये दिखते हैं। बिल्कुल वैसे ही जैसे अटल जी को गोविन्दाचार्य ने मुखौटा बताया था और जैसे मोदी ने नोटबन्दी के वक़्त संघियों के कालेधन को गोरा करवाने का पूरा इन्तज़ाम रखा था! भगवा ख़ानदान ने हर मोर्चे पर विफल रही मोदी सरकार के लिए बेहद ज़बरदस्त नारा भी तैयार किया है, ‘जो शुरू किया, उसे पूरा किया!’ प्रधानमंत्री कार्यालय ने ऐसी 25 योजनाओं की पहचान की है जो अगले तीन महीने में पूरा हो सकती है। इनका उद्घाटन मोदी से करवाया जाएगा और ग़ली-ग़ली में नारा लगवाया जाएगा, ‘जो शुरू किया, उसे पूरा किया!’

रणनीति ये भी बनी है कि यदि प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो, तो ही आधे-अधूरे को भी वैसे ही पूरा बता दिया जाए जैसे 80 किलोमीटर वाले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के 9 किलोमीटर के हिस्से पर रोड शो करके उसके ‘पूरा होने’ का जश्न मना लिया गया! बिल्कुल उसी तरह से अगले वाले दौर में देश पर आधी-अधूरी योजनाओं के उद्घाटन की बौछार होने वाली है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र से आपको कम से कम 50 भव्य चुनावी रैलियों में मोदी लीलाएँ देखने को मिलेंगी। इसी अलावा, जल्द ही ‘जो शुरू किया, उसे पूरा किया’ वाली हवाबाज़ी को स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने का इरादा है!