कल्पना कीजिए कि राहुल गाँधी, संघ के आगे ये शर्त रख दें कि भागवत के सामने जाने से पहले वो सम्बित पात्रा, निर्मला सीतारमन और रविशंकर प्रसाद के साथ बौद्धिक तथा सवाल-जबाब का एक-एक सत्र ऐसे बिताना चाहते हैं जिसका सभी भक्त मीडिया चैनलों के लिए सीधा प्रसारण करना अनिवार्य हो! क्योंकि बीजेपी की ओर से इन तीनों ने बीते साढ़े चार साल में राहुल गाँधी से अनगिनत सवाल पूछे हैं! राहुल के संघी गुरुकुल के कुलाधिपति से मुलाक़ात से पहले वहाँ के प्रोफ़ेसरों के सवालों का सन्तोषजनक जबाब तो देना ही चाहिए!

क्या मोहन भागवत ऐसी शर्त को मान पाएँगे? यदि नहीं, तो राहुल को उस संघ के दरवाज़े जाने की क्या ज़रूरत है, जो काँग्रेस मुक्त भारत करने के बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष से नफ़रत-विरोधी संस्कारों के बारे में जानता चाहता है!

राहुल को संघ के सामने ये भी शर्त रखनी चाहिए कि वो उन्हें पप्पू कहने वालों की निन्दा करे और नेहरू-गाँधी ख़ानदान के चरित्रहनन के इरादे से फ़ैलाये गये असंख्य झूठ और अफ़वाहों को ख़ारिज़ करे!

वैसे यदि राहुल ने संघ का न्यौता क़बूल कर लिया तो वो ये साबित करने का ज़ोरदार मौक़ा भी होगा कि ‘चन्दन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग!’

बहरहाल, इस प्रसंग पर क्या आप अपना नज़रिया यहाँ ज़ाहिर करना चाहेंगे?