Author: Mukesh Kumar Singh

रुपया और मोदी क्यों गिरा और गिरता ही चला गया?

क्या आपको देश के चोर चौकीदार का ये बयान याद है कि “दिल्ली की सरकार जबाब नहीं दे रही है, देश जानना चाहता है प्रधानमंत्री जी, ऐसा क्या कारण है कि आज अकेला हिन्दुस्तान का रुपया डॉलर के मुक़ाबले गिरता ही चला गया, गिरता ही चला गया और क्यों चला गया?” क्या किसी मतान्ध और राष्ट्रवादी को बीते पाँच साल में उपरोक्त सवाल का जबाब मिला, जिसे सदी के सबसे बड़े झूठे नरेन्द्र मोदी ने पूछा था? अरे, मनमोहन तो कमज़ोर थे, सोनिया गाँधी के तलवे चाटते थे, चोरों और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देते थे, चौकीदारों से बैंकों में...

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क्या अमेरिका F-16 विमान के बेज़ा इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को सज़ा देगा?

27 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के नौशेरा और राजौरी सेक्टर में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान की ओर से दिखाये अदम्य साहस और वीरता ने पाकिस्तान को दो ऐसे गुनाहों को करने के लिए मज़बूर कर दिया, जिन पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। पहला क़सूर है – 17 नवम्बर 2006 को अमेरिका से हुए क़रार को तोड़कर भारत के ख़िलाफ़ F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल और दूसरा गुनाह है – युद्ध बन्दियों के प्रति व्यवहार से जुड़ी जेनेवा संघि, 1949 का उल्लंघन। दोनों अपराधों के सबूत सारी दुनिया के सामने हैं। चाहे सच्चा हो या झूठा...

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ऑपरेशन बालाकोट में ग़लत ‘सूत्रों’ के भरोसे ही रहा भारतीय मीडिया

मैं तीन दशक से पेशेवर पत्रकार हूँ। कई बड़े और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग की। सैन्य अभियानों और संसद तथा अक्षरधाम आतंकी हमलों जैसी बड़ी घटनाओं का भी टीवी के लिए रिपोर्टिंग करने का भी अवसर मिला। सियाचिन, लेह, गुरेज़, उरी जैसे इलाक़ों की सीमान्त चौकियों पर भी जाने का मौक़ा मिला। रक्षा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त ‘डिफ़ेंस कोरेसपोंडेंट’ भी रहा। संसद, पीएमओ, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट, राष्ट्रपति भवन, विदेश-गृह और वित्त मंत्रालय तथा बीजेपी-काँग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों का भी दशकों तक बीट रिपोर्टर रहा। असंख्य ख़बरें ‘सूत्रों’ से बटोरीं और ज़िम्मेदारी के साथ प्रसारित कीं। कभी कोई ‘ख़बर’...

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सिन्धु का पानी तो भारत सिर के बल खड़े होकर भी नहीं रोक सकता!

प्रधानमंत्री होने के नाते नरेन्द्र मोदी को अच्छी तरह से मालूम था कि पाकिस्तान के हिस्से वाले सिन्धु के पानी को रोकना तक़रीबन नामुमकिन है। सच्चाई तो ये है कि 1960 में दोनों पड़ोसियों के बीच हुए सिन्धु नदी जल समझौते के मुताबिक़, भारत को जो 20 फ़ीसदी पानी मिला था, उसके दोहन के लिए भी हम आज तक कोई ख़ास इन्तज़ाम नहीं कर पाये।

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ग़रीब सवर्णों को आरक्षण: इस लॉलीपॉप से भी मोदी सरकार का भला नहीं होगा

ताज़ा विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी को लेकर सवर्ण हिन्दुओं में ये धारणा फैलने लगी कि मोदी सरकार के जाने का वक़्त आ गया और इसने न तो राम मन्दिर को लेकर अपना वादा निभाया और ना ही आरक्षण को लेकर। सवर्णों के ऐसे आक्रोश को देखते हुए ही बीजेपी के पैरों तले ज़मीन खिसकने लगी है। पार्टी को इसका भरपूर आभास भी हो रहा है। इसीलिए ‘ग़रीब सवर्णों को आरक्षण’ के ज़रिये मोदी सरकार ने तुरुप का पत्ता फेंका है! सरकार ने अब भागते भूत की लंगोटी के रूप में सवर्ण आरक्षण के लॉलीपॉप को आज़माने की जुगत निकाली है।

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