Author: Mukesh Kumar Singh

सीबीआई के अच्छे दिनों के लिए तो अभी दिल्ली बहुत दूर है!

क्या आप जानते हैं कि #CBI निदेशक के पास भी ये अधिकार नहीं है कि वो अपने मातहत DySP, ASP, SP, DIG, IG और Additional Director का तबादला कर सके? इन अफ़सरों के तबादलों का अधिकार सिर्फ़ कार्मिक विभाग यानी DoPT के पास है। ये विभाग प्रधानमंत्री के मातहत है। सीबीआई के मुखिया के पास सिर्फ़ इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारियों का अधिकार है। लेकिन जैसे ही मौजूदा सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को ज़बरन छुट्टी पर भेजकर देश की शीर्ष जाँच संस्था की क़मान नागेश्वर राव को सौंपी गयी, वैसे ही दर्जन भर अफ़सरों का ताबड़तोड़ तबादला भी कर...

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गोवा में एक बार फिर राजनीति का सबसे घिनौना चेहरा सामने है!

बीजेपी के धन-बल ने काँग्रेस को मिले जनादेश को पटखनी दी थी, और अब भी, विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त का गोरखधन्धा इसलिए आसानी से परवान चढ़ गया, क्योंकि बीजेपी को किसी भी क़ीमत पर गोवा में अपनी सरकार बचानी है।

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मानो या न मानो, MeToo के नाम पर एमजे अकबर इस्तीफ़ा नहीं देने वाले!

#MeToo यानी दुनिया भर की उन महिलाओं की आवाज़ जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी में कभी ना कभी यौन-उत्पीड़न का दंश झेला हो और वो भी किसी नामी-गिरामी या जानी-पहचानी हस्ती की हवाले से! जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जो #MeToo से अछूता हो! भारत ही नहीं, सारी दुनिया के लिए यही हक़ीक़त है। वो बात अलग है, तमाम पतित करतूतों की तरह, #MeToo के तहत बेनक़ाब होने वाले लोग, भी ख़ुद को पाक-साफ़ बताने में लगे हैं! ये स्वाभाविक भी है, क्योंकि क्या कभी किसी ‘शरीफ़’ आदमी ने ये क़बूल किया है कि उसके चोले में कैसी हवस...

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गडकरी की हिम्मत का जबाब नहीं, माना कि 2014 में बन्दर के हाथ में उस्तूरा आ गया!

“हमें उम्मीद नहीं थी कि हम सत्ता में आएँगे। इसलिए हमें सलाह दी गयी कि जनता से बड़े-बड़े वादे करो। कुछ नहीं बिगड़ने वाला। लेकिन हम तो सत्ता में आ गये। अब लोग हमारे उन्हीं वादों को हमें याद दिलाते हैं। मुझसे सवाल करते हैं, फड़नवीस से पूछते हैं। अन्य नेताओं को भी बड़े-बड़े वादे याद दिलाते हैं। लेकिन हम करें तो करें क्या? बोले तो बोले क्या? वो वादे तो क़तई पूरे होने नहीं वाले। लिहाज़ा, अब हम मुस्कुराते हुए आगे बढ़ जाते हैं!”

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ज़हर उगलने वाले 13 सेकेंड के इस वीडियो को क्या आपने देखा!

वीडियो के बारे में आपको ये नहीं बताया जाता कि ये कहाँ का नज़ारा है? कब का नज़ारा है? क्या आयोजन था? कौन आयोजक था? यदि वीडियो आपत्तिजनक है तो पुलिस-प्रशासन, सरकार-क़ानून ने क्या कोई कार्रवाई की या नहीं? आपको कोई ये भी क्यों नहीं बताया कि जब मामला इतना गम्भीर है, तो इस वीडियो को भक्त चैनलों पर क्यों नहीं दिखाया गया? वहाँ इसे लेकर तलवारें क्यों नहीं भाँजी गयीं?

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