Author: Mukesh Kumar Singh

मोदी सरकार की औक़ात नहीं कि वो क़ानून बनाकर अयोध्या विवाद ख़त्म कर दे!

चुनाव को सामने देख भगवा ख़ानदान चाहता है कि मोदी सरकार अध्यादेश लाकर अयोध्या की ज़मीन हिन्दुओं को सौंप दे। इसके लिए दलीलें गढ़ी गयीं कि अब देरी बर्दाश्त नहीं हो रही या अब धैर्य जवाब दे रहा है! मोदी सरकार के क़ानून मंत्री कहते हैं कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। लेकिन विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इन्तज़ार ज़रूर करना चाहिए। मोदी सरकार का सबसे बड़ा धर्म संकट ये है कि इसी प्रसंग में 1993 में सुप्रीम कोर्ट ये कह चुका है कि ‘ज़मीन के झगड़ों को ख़त्म करने के लिए उसका अध्यादेश लाने या क़ानून बनाने का क़दम संवैधानिक नहीं था।’ वही दशा आज 25 साल बाद भी है।

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राम मन्दिर: क़ानून मंत्री का ढोंग, हिन्दुओं का धैर्य और कोर्ट की लाज

क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पेशेवर वक़ील हैं। वो ख़ुद को अयोध्या विवाद का बहुत बड़ा विशेषज्ञ मानते हैं। क्योंकि उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिन्दू पक्ष की पैरवी की थी। इसीलिए जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो ‘विवादित ज़मीन के मालिकाना हक़’ को तय करने वाले मुक़दमे की सुनवाई को आगे बढ़ाने के बारे में जनवरी में विचार करेगा, वैसे ही रवि बाबू राजनीति बतियाने लगे। बोले कि “हम राम मन्दिर के मुद्दे को चुनाव से नहीं जोड़ते। हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा है। हम कोर्ट का सम्मान करते हैं।” लेकिन मोदी सरकार के ही एक ‘विचित्र’ मंत्री...

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सीबीआई के अच्छे दिनों के लिए तो अभी दिल्ली बहुत दूर है!

क्या आप जानते हैं कि #CBI निदेशक के पास भी ये अधिकार नहीं है कि वो अपने मातहत DySP, ASP, SP, DIG, IG और Additional Director का तबादला कर सके? इन अफ़सरों के तबादलों का अधिकार सिर्फ़ कार्मिक विभाग यानी DoPT के पास है। ये विभाग प्रधानमंत्री के मातहत है। सीबीआई के मुखिया के पास सिर्फ़ इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारियों का अधिकार है। लेकिन जैसे ही मौजूदा सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को ज़बरन छुट्टी पर भेजकर देश की शीर्ष जाँच संस्था की क़मान नागेश्वर राव को सौंपी गयी, वैसे ही दर्जन भर अफ़सरों का ताबड़तोड़ तबादला भी कर...

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गोवा में एक बार फिर राजनीति का सबसे घिनौना चेहरा सामने है!

बीजेपी के धन-बल ने काँग्रेस को मिले जनादेश को पटखनी दी थी, और अब भी, विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त का गोरखधन्धा इसलिए आसानी से परवान चढ़ गया, क्योंकि बीजेपी को किसी भी क़ीमत पर गोवा में अपनी सरकार बचानी है।

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मानो या न मानो, MeToo के नाम पर एमजे अकबर इस्तीफ़ा नहीं देने वाले!

#MeToo यानी दुनिया भर की उन महिलाओं की आवाज़ जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी में कभी ना कभी यौन-उत्पीड़न का दंश झेला हो और वो भी किसी नामी-गिरामी या जानी-पहचानी हस्ती की हवाले से! जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जो #MeToo से अछूता हो! भारत ही नहीं, सारी दुनिया के लिए यही हक़ीक़त है। वो बात अलग है, तमाम पतित करतूतों की तरह, #MeToo के तहत बेनक़ाब होने वाले लोग, भी ख़ुद को पाक-साफ़ बताने में लगे हैं! ये स्वाभाविक भी है, क्योंकि क्या कभी किसी ‘शरीफ़’ आदमी ने ये क़बूल किया है कि उसके चोले में कैसी हवस...

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